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द्रोण पर्व
अध्याय १५४
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सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णो लघुचित्रास्त्रय़ोधी; सर्वा दिशो व्यावृणोद्वाणजालैः |  २२   क
न वै किञ्चिद्व्यापतत्तत्र भूतं; तमोभूते साय़कैरन्तरिक्षे ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति