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द्रोण पर्व
अध्याय १५४
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सञ्जय़ उवाच
तस्मादेनं राक्षसं घोररूपं; जहि शक्त्या दत्तय़ा वासवेन |  ५०   क
मा कौरवाः सर्व एवेन्द्रकल्पा; रात्रीमुखे कर्ण नेशुः सय़ोधाः ||  ५०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति