menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १५४
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
ततोऽन्तरिक्षादपतद्गतासुः; स राक्षसेन्द्रो भुवि भिन्नदेहः |  ६०   क
अवाक्षिराः स्तव्धगात्रो विजिह्वो; घटोत्कचो महदास्थाय़ रूपम् ||  ६०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति