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शान्ति पर्व
अध्याय ६३
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भीष्म उवाच
लोके चेदं सर्वलोकस्य न स्या; च्चातुर्वर्ण्यं वेदवादाश्च न स्युः |  १०   क
सर्वाश्चेज्याः सर्वलोकक्रिय़ाश्च; सद्यः सर्वे चाश्रमस्था न वै स्युः ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति