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आदि पर्व
अध्याय १५५
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व्राह्मण उवाच
भारद्वाजस्य हन्तारं सोऽभिसन्धाय़ भूमिपः |  ३३   क
आजह्रे तत्तथा सर्वं द्रुपदः कर्मसिद्धय़े ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति