आदि पर्व  अध्याय २७

सूत उवाच

न चाप्येवं त्वय़ा भूय़ः क्षेप्तव्या व्रह्मवादिनः |  ३२   क
न चावमान्या दर्पात्ते वाग्विषा भृशकोपनाः ||  ३२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति