आदि पर्व  अध्याय १५५

व्राह्मण उवाच

श्यामा पद्मपलाशाक्षी नीलकुञ्चितमूर्धजा |  ४२   क
मानुषं विग्रहं कृत्वा साक्षादमरवर्णिनी ||  ४२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति