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शान्ति पर्व
अध्याय १५५
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भीष्म उवाच
इन्द्रिय़ाणीह रक्षन्ति धनधान्याभिगुप्तय़े |  १०   क
तस्मादर्थे च धर्मे च तपो नानशनात्परम् ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति