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शान्ति पर्व
अध्याय ६५
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भीष्म उवाच
अन्याय़ेन प्रवृत्तानि निवृत्तानि तथैव च |  ३४   क
अन्तरा विलय़ं यान्ति यथा पथि विचक्षुषः ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति