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वन पर्व
अध्याय १५५
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वैशम्पाय़न उवाच
अतीतानागते विद्वान्कुशलः सर्वधर्मवित् |  २३   क
अन्वशासत्स धर्मज्ञः पुत्रवद्भरतर्षभान् ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति