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वन पर्व
अध्याय १५५
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वैशम्पाय़न उवाच
उपेतमन्यैश्च तदा मृगैर्मृदुनिनादिभिः |  ३६   क
ते गन्धमादनवनं तन्नन्दनवनोपमम् ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति