आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ३५

वैशम्पाय़न उवाच

कच्चिद्धर्मसुतो राजा त्वय़ा प्रीत्याभिनन्दितः |  ७   क
भीमार्जुनय़माश्चैव कच्चिदेतेऽपि सान्त्विताः ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति