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शान्ति पर्व
अध्याय ७४
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कश्यप उवाच
अवश्यमेतत्कर्तव्यं राज्ञा वलवतापि हि |  ३२   क
व्रह्म वर्धय़ति क्षत्रं क्षत्रतो व्रह्म वर्धते ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति