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उद्योग पर्व
अध्याय १५५
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वैशम्पाय़न उवाच
विनिवर्त्य ततो रुक्मी सेनां सागरसंनिभाम् |  ३४   क
दुर्योधनमुपागच्छत्तथैव भरतर्षभ ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति