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द्रोण पर्व
अध्याय १५५
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वासुदेव उवाच
शक्तिहस्तं पुनः कर्णं को लोकेऽस्ति पुमानिह |  १३   क
य एनमभितस्तिष्ठेत्कार्त्तिकेय़मिवाहवे ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति