menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १५५
chevron_left
chevron_right
वासुदेव उवाच
तपान्ते तोय़दो यद्वच्छरधाराः क्षरत्यसौ |  २७   क
दिव्यास्त्रजलदः कर्णः पर्जन्य इव वृष्टिमान् |  २७   ख
सोऽद्य मानुषतां प्राप्तो विमुक्तः शक्रदत्तय़ा ||  २७   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति