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आदि पर्व
अध्याय १५६
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वैशम्पाय़न उवाच
यानीह रमणीय़ानि वनान्युपवनानि च |  ४   क
सर्वाणि तानि दृष्टानि पुनः पुनररिन्दम ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति