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शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
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भीष्म उवाच
मद्गुभिः खञ्जरीटैश्च विचित्रैर्जीवजीवकैः |  ५   क
चित्रवर्णैर्मय़ूरैश्च केकाशतविराजितैः |  ५   ख
राजहंससमूहैश्च हृष्टैः परभृतैस्तथा ||  ५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति