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शान्ति पर्व
अध्याय १५४
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भीष्म उवाच
एतस्य तु महाप्राज्ञ दोषस्य सुमहान्गुणः |  ३५   क
क्षमाय़ां विपुला लोकाः सुलभा हि सहिष्णुना ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति