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उद्योग पर्व
अध्याय १८४
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भीष्म उवाच
यदि शक्यो मय़ा जेतुं जामदग्न्यः प्रतापवान् |  ५   क
दैवतानि प्रसन्नानि दर्शय़न्तु निशां मम ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति