menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय ६६
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
विव्याध च रणे द्रोणमनुमान्य विशां पते |  १०   क
क्षत्रधर्मं समास्थाय़ नवभिः साय़कैः पुनः ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति