उद्योग पर्व  अध्याय १५७

सञ्जय़ उवाच

उलूक गच्छ कैतव्य पाण्डवान्सहसोमकान् |  ३   क
गत्वा मम वचो व्रूहि वासुदेवस्य शृण्वतः ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति