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द्रोण पर्व
अध्याय १५७
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सञ्जय़ उवाच
सा तु वुद्धिः कृताप्येवं जाग्रति त्रिदशेश्वरे |  २७   क
अप्रमेय़े हृषीकेशे युद्धकाले व्यमुह्यत ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति