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द्रोण पर्व
अध्याय १५७
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वासुदेव उवाच
तस्मिन्विनिहते सर्वे पाण्डवाः सृञ्जय़ैः सह |  ३५   क
भविष्यन्ति गतात्मानः सुरा इव निरग्नय़ः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति