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आदि पर्व
अध्याय १५८
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वैशम्पाय़न उवाच
उल्मुकं तु समुद्यम्य तेषामग्रे धनञ्जय़ः |  ३   क
प्रकाशार्थं यय़ौ तत्र रक्षार्थं च महाय़शाः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति