वन पर्व  अध्याय १५८

वैशम्पाय़न उवाच

राजद्विष्टं न कर्तव्यमिति धर्मविदो विदुः |  ११   क
त्रिदशानामिदं द्विष्टं भीमसेन त्वय़ा कृतम् ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति