menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३२
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
एवं स राजा कुरुवृद्धवर्यः; समागतस्तैर्नरदेवपुत्रैः |  १७   क
पप्रच्छ सर्वान्कुशलं तदानीं; गतेषु सर्वेष्वथ तापसेषु ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति