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विराट पर्व
अध्याय ३६
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वैशम्पाय़न उवाच
स राजधान्या निर्याय़ वैराटिः पृथिवीञ्जय़ः |  १   क
प्रय़ाहीत्यव्रवीत्सूतं यत्र ते कुरवो गताः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति