कर्ण पर्व  अध्याय २९

सञ्जय़ उवाच

ततोऽव्रवीन्मां याचन्तमपराद्धं प्रय़त्नतः |  ३७   क
व्याहृतं यन्मय़ा सूत तत्तथा न तदन्यथा ||  ३७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति