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द्रोण पर्व
अध्याय ९८
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सञ्जय़ उवाच
ततो द्रोणो महाराज नाम विश्राव्य संय़ुगे |  २६   क
पाण्डुपाञ्चालमत्स्यानां प्रचक्रे कदनं महत् ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति