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द्रोण पर्व
अध्याय १५८
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सञ्जय़ उवाच
अस्त्रहेतोर्गतं ज्ञात्वा पाण्डवं श्वेतवाहनम् |  २८   क
असौ कृष्ण महेष्वासः काम्यके मामुपस्थितः |  २८   ख
उषितश्च सहास्माभिर्यावन्नासीद्धनञ्जय़ः ||  २८   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति