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वन पर्व
अध्याय २०३
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व्याध उवाच
लक्षणं तु प्रसादस्य यथा तृप्तः सुखं स्वपेत् |  ३६   क
निवाते वा यथा दीपो दीप्येत्कुशलदीपितः ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति