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अनुशासन पर्व
अध्याय ११२
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वृहस्पतिरु उवाच
अय़ो हृत्वा तु दुर्वुद्धिर्वाय़सो जाय़ते नरः |  ९७   क
पाय़सं चोरय़ित्वा तु तित्तिरित्वमवाप्नुते ||  ९७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति