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शान्ति पर्व
अध्याय १५९
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भीष्म उवाच
स्त्रीरत्नं दुष्कुलाच्चापि विषादप्यमृतं पिवेत् |  ३०   क
अदुष्टा हि स्त्रिय़ो रत्नमाप इत्येव धर्मतः ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति