शान्ति पर्व  अध्याय १५९

भीष्म उवाच

गुरुतल्पमधिष्ठाय़ दुरात्मा पापचेतनः |  ४६   क
सूर्मीं ज्वलन्तीमाश्लिष्य मृत्युना स विशुध्यति ||  ४६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति