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शान्ति पर्व
अध्याय १५९
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भीष्म उवाच
यस्य त्रैवार्षिकं भक्तं पर्याप्तं भृत्यवृत्तय़े |  ५   क
अधिकं वापि विद्येत स सोमं पातुमर्हति ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति