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शान्ति पर्व
अध्याय ३१२
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भीष्म उवाच
तस्या द्वारं समासाद्य द्वारपालैर्निवारितः |  २५   क
स्थितो ध्यानपरो मुक्तो विदितः प्रविवेश ह ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति