वन पर्व  अध्याय १५९

वैश्रवण उवाच

योऽसौ सर्वान्महीपालान्धर्मेण वशमानय़त् |  २२   क
स शन्तनुर्महातेजाः पितुस्तव पितामहः |  २२   ख
प्रीय़ते पार्थ पार्थेन दिवि गाण्डीवधन्वना ||  २२   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति