वन पर्व  अध्याय १५९

वैश्रवण उवाच

य एवं वर्तते पार्थ पुरुषः सर्वकर्मसु |  ४   क
स लोके लभते वीर यशः प्रेत्य च सद्गतिम् ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति