द्रोण पर्व  अध्याय १५९

सञ्जय़ उवाच

चुक्रुशुः कर्ण कर्णेति राजन्दुर्योधनेति च |  २७   क
उपारमत पाण्डूनां विरता हि वरूथिनी ||  २७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति