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द्रोण पर्व
अध्याय १५९
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सञ्जय़ उवाच
गजाः शुशुभिरे तत्र निःश्वसन्तो महीतले |  ३८   क
विशीर्णा गिरय़ो यद्वन्निःश्वसद्भिर्महोरगैः ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति