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द्रोण पर्व
अध्याय १५९
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सञ्जय़ उवाच
समां च विषमां चक्रुः खुराग्रैर्विक्षतां महीम् |  ३९   क
हय़ाः काञ्चनय़ोक्त्राश्च केसरालम्विभिर्युगैः |  ३९   ख
सुषुपुस्तत्र राजेन्द्र युक्ता वाहेषु सर्वशः ||  ३९   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति