आदि पर्व  अध्याय १६

सूत उवाच

श्रीरनन्तरमुत्पन्ना घृतात्पाण्डुरवासिनी |  ३४   क
सुरा देवी समुत्पन्ना तुरगः पाण्डुरस्तथा ||  ३४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति