आदि पर्व  अध्याय १६

सूत उवाच

श्रीः सुरा चैव सोमश्च तुरगश्च मनोजवः |  ३६   क
यतो देवास्ततो जग्मुरादित्यपथमाश्रिताः ||  ३६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति