सौप्तिक पर्व  अध्याय १६

वैशम्पाय़न उवाच

पाण्डवाश्चापि गोविन्दं पुरस्कृत्य हतद्विषः |  २०   क
कृष्णद्वैपाय़नं चैव नारदं च महामुनिम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति