सौप्तिक पर्व  अध्याय १६

वैशम्पाय़न उवाच

प्रय़ाणे वासुदेवस्य शमार्थमसितेक्षणे |  २७   क
यान्युक्तानि त्वय़ा भीरु वाक्यानि मधुघातिनः ||  २७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति