स्त्री पर्व  अध्याय १६

वैशम्पाय़न उवाच

तान्सुपर्णाश्च गृध्राश्च निष्कर्षन्त्यसृगुक्षितान् |  २७   क
निगृह्य कवचेषूग्रा भक्षय़न्ति सहस्रशः ||  २७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति