menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १४८
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
एवं गते प्राप्तकालं कर्णानीके पुनः पुनः |  २६   क
भवान्व्यवस्यतां क्षिप्रं द्रवते हि वरूथिनी ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति