स्त्री पर्व  अध्याय १६

वैशम्पाय़न उवाच

रक्तोत्पलवनानीव विभान्ति रुचिराणि वै |  ४३   क
मुखानि परमस्त्रीणां परिशुष्काणि केशव ||  ४३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति