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द्रोण पर्व
अध्याय १५६
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अर्जुन उवाच
कथमस्मद्धितार्थं ते कैश्च योगैर्जनार्दन |  १   क
जरासन्धप्रभृतय़ो घातिताः पृथिवीष्वराः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति